कहां रहेगी चिड़िया ?
आंधी आई जोर-शोर से
डाली टूटी है झकोर से
उड़ा घोंसला बेचारी का
किससे अपनी बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी ?
घर में पेड़ कहाँ से लाएँ
कैसे यह घोंसला बनाएँ
कैसे फूटे अंडे जोड़ें
किससे यह सब बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी ?
-महादेवी वर्मा
मानव करुणा जब समष्टि के साथ समन्वित हो जाती है तो ऐसी कालजई कृतियाँ सामने आती हैं !
ReplyDeletebahadevi varma ki ki khoobsurat kavita pesh karne ke liye haardik aabhaar!!
ReplyDeleteबहुत ही स्पष्ट। आभार।
ReplyDeleteमहादेवी बर्मा जी की खूबसूरत कविता के लिए धन्यवाद|
ReplyDeleteविवेक जैन जी, आपकी टिप्पणी जो प्रवक्ता पर छपी थी, वहांसे यह कडी जुडी। बहुत अच्छा हुआ। सुंदर वेब साईट के लिए बधाई।
ReplyDeleteआप सब का बहुत बहुत धन्यवाद प्रोत्साहन के लिये.
ReplyDeleteविवेक जैन
Abhaar....
ReplyDeletebahut badiyaa
अच्छी कविता प्रकृति का विनाश मतलब हमारा विनाश
ReplyDeleteprasangik,kaljayi rachana. varma ko naman..
ReplyDeleteखूबसूरत कविता के लिए धन्यवाद|
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