जीवन कभी सूना न हो
कुछ मैं कहूँ, कुछ तुम कहो।
तुमने मुझे अपना लिया
यह तो बड़ा अच्छा किया
जिस सत्य से मैं दूर था
वह पास तुमने ला दिया
अब ज़िन्द्गी की धार में
कुछ मैं बहूँ, कुछ तुम बहो।
जिसका हृदय सुन्दर नहीं
मेरे लिए पत्थर वही।
मुझको नई गति चाहिए
जैसे मिले वैसे सही।
मेरी प्रगति की साँस में
कुछ मैं रहूँ कुछ तुम रहो।
मुझको बड़ा सा काम दो
चाहे न कुछ आराम दो
लेकिन जहाँ थककर गिरूँ
मुझको वहीं तुम थाम लो।
गिरते हुए इन्सान को
कुछ मैं गहूँ कुछ तुम गहो।
संसार मेरा मीत है
सौंदर्य मेरा गीत है
मैंने अभी तक समझा नहीं
क्या हार है क्या जीत है
दुख-सुख मुझे जो भी मिले
कुछ मैं सहूं कुछ तुम सहो।
- रमानाथ अवस्थी
ramanath ji kavta bahut achchhi lagi .vishesh roop me ye panktiyan-
ReplyDeleteसंसार मेरा मीत है
सौंदर्य मेरा गीत है
मैंने अभी तक समझा नहीं
क्या हार है क्या जीत है
aabhar
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ReplyDeleteदुख-सुख मुझे जो भी मिले
कुछ मैं सहूं कुछ तुम सहो।
How beautiful !
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बहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteज़िन्दगी एक नीड़सी है ,
ReplyDeleteहर तरफ एक भीड़ सी है ,
कल ये तिनके उड़ गए तो फिर जाने हम कहां हों ,
जाने मन नाराज नहो !
मुझको बड़ा सा काम दो
ReplyDeleteचाहे न कुछ आराम दो
लेकिन जहाँ थककर गिरूँ
मुझको वहीं तुम थाम लो।
कविता की प्रत्येक पंक्ति में अत्यंत सुंदर भाव हैं.... संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता...
संसार मेरा मीत है
ReplyDeleteसौंदर्य मेरा गीत है
मैंने अभी तक समझा नहीं
क्या हार है क्या जीत है
दुख-सुख मुझे जो भी मिले
कुछ मैं सहूं कुछ तुम सहो।
वाह, बहुत सुन्दर भाव हैं !
विवेक जी, आपका बहुत आभार !
aap ke blog par aakar achchha laga apni kavita to sabhi likhte hai par dusro ki kavito ko apne blog par sthan dena aap ki mhanta hai.-- kanpur blog ki taraph se kiran
ReplyDeleteप्रेमरस से भरा ...लयबद्ध, प्रवाहपूर्ण , भावपूर्ण ....सुन्दर गुनगुनानेवाला गीत
ReplyDeleteअनुपम रचना।
ReplyDeleteसंसार मेरा मीत है
ReplyDeleteसौंदर्य मेरा गीत है
मैंने अभी तक समझा नहीं
क्या हार है क्या जीत है
सुन्दर अभिव्यक्ति्
मेरे ब्लांग में आप आए धन्यवाद…
रमानाथ अवस्थी को कितनी ही मर्तबा कविता पाठ करते सूना है .अच्छी रचना आपने परोसी है उनकी .शुक्रिया !कुछ तुम कहो -कुछ मैं कहूं .
ReplyDeleteरमानाथ अवस्थी को कितनी ही मर्तबा कविता पाठ करते सुना है .अच्छी रचना आपने परोसी है उनकी .शुक्रिया !कुछ तुम कहो -कुछ मैं कहूं .
ReplyDeleteThis is really beautiful
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