सर फ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।
करता नहीं क्यूं दूसरा कुछ बात चीत
देखता हूं मैं जिसे वो चुप तिरी मेहफ़िल में है।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है।
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है।
खींच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उम्मीद
आशिक़ों का आज झमघट कूचा-ए-क़ातिल में है।
यूं खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है।
-राम प्रसाद बिस्मिल
जोश भरता है यह।
ReplyDeleteदेशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति के लिए आभार!
ReplyDeleteजय हिंद!
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeleteमेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
अमर रचना की प्रस्तुति......आभार.
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
यह तो शहीद में ऐसे गाया है कलाकारों ने कि बस नये गाने वाले तो उनके सामने कहीं नहीं टिकेंगे। अद्भुत है यह!
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति
ReplyDeleteस्वतन्त्रता की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
जय हिंद जय भारत
स्वतंत्रता दिवस पर बिस्मिल की रचना पढवाने के लिए शुक्रिया...फुटकर में सुनी थी...आज पूरी पढ़ने का मौका मिला...
ReplyDeleteGreat post for I-Day...These words inspire patriotism and every Indian loves it.
ReplyDeleteवाह वाह... ऐसे अवसर पर इस कालजयी रचना शेयर करने के लिए सादर आभार...
ReplyDeleteराष्ट्र पर्व की सादर बधाइयां...
सुन्दर प्रस्तुति स्वतंत्रता दिवस के शुभावसर पर.आपको भी स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें
ReplyDeleteऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
ReplyDeleteअब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है।
ये पंक्तियाँ हमेशा ही जोश से भर देती हैं ...
आभार !
आप को बहुत बहुत धन्यवाद की आपने मेरे ब्लॉग पे आने के लिये अपना किमती समय निकला
ReplyDeleteऔर अपने विचारो से मुझे अवगत करवाया मैं आशा करता हु की आगे भी आपका योगदान मिलता रहेगा
बस आप से १ ही शिकायत है की मैं अपनी हर पोस्ट आप तक पहुचना चाहता हु पर अभी तक आप ने मेरे ब्लॉग का अनुसरण या मैं कहू की मेरे ब्लॉग के नियमित सदस्य नहीं है जो में आप से आशा करता हु की आप मेरी इस मन की समस्या का निवारण करेगे
आपका ब्लॉग साथी
दिनेश पारीक
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत प्रेरणा दायक बिस्मिल जी की रचना पढवाने के लिए धन्यवाद...
ReplyDeleteयूं खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार बार
ReplyDeleteक्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है।
सामयिक प्रस्तुतिकरण
विस्मिल जी की कविता आज के रूप में काफी प्रासंगिक है !देखना है ऊंट किस करवट लेता है ! बधाई
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