कोई मौसम तुम सा
कोई मौसम तुम सा आए
धरती का ये जीवन दुष्कर
देख देख प्रियतम वो अम्बर
झर झर नीर बहाए
कोई मौसम तुम सा आए
उठे गंध वह भीना भीना
जैसे ओढ़े आंचल झीना
धरा प्रणय रस सिक्त अघाये
कोई मौसम तुम सा आए
आए चुपके से कुछ अक्सर
जैसे शरद उंगलियों में भर
नटखट सखी गुदगुदा जाए
कोई मौसम तुम सा आए
या जैसे रक्तिम पलाश वन
अमलतास के स्वर्णिम तरुवर
धरती का आंचल रंग जाए
कोई मौसम तुम सा आए
-जया पाठक
बहुत सुन्दर।
ReplyDeleteGreat personification...:)
ReplyDeleteजया पाठक जी की ये कविता बहुत अच्छी लगी आभार विवेक जी.
ReplyDelete.
वह दिन खुदा करे कि तुझे आजमायें हम .
सुंदर रचना पढवान के लिय शुक्रिया...
ReplyDeletevivek ji
ReplyDeletekya likhun ?--
itni sundar v behtreen shbdo se saji aapki rachna man ko bhigo gai .bahut bahut hi achhi lagi aapki yah kavita aur shbdo ka chayan to kya kahne
bahut bahut badhai
poonam
बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
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