किसी को हमने याँ अपना ना पाया जिसे पाया उसे बेगाना पाया
कहाँ ढूँढ़ा उसे किस जा ना पाया कोई पर ढूँढ़ने वाला न पाया
उड़ा कर आशियाँ सरसर ने मेरा किया साफ़ इस क़दर तिनका न पाया
से पाना नहीं आसॉं, कि हमने न जब तक आपको खोया, न पाया
दवाए-दर्दे-दिल मैं किस से पूछूँ तबीबे-इश्क़ को ढूँढा न पाया
- बहादुर शाह ज़फ़र
पन्त जी बहुत ही अच्छी रचना ....
ReplyDeleteधन्यवाद् ....
बहुत ही अच्छी रचना ....
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी।
ReplyDeleteमाशा अल्लाह ! ग़ालिब की सोहबत में रहकर बहादुर शाह ज़फर साहब भी अच्छी शायरी कर लेते थे. वाह ! वाह !!
ReplyDelete