यह मुरझाया हुआ फूल है,
इसका हृदय दुखाना मत।
स्वयं बिखरने वाली इसकी
पंखड़ियाँ बिखराना मत॥
गुजरो अगर पास से इसके
इसे चोट पहुँचाना मत।
जीवन की अंतिम घड़ियों में
देखो, इसे रुलाना मत॥
अगर हो सके तो ठंडी
बूँदें टपका देना प्यारे!
जल न जाए संतप्त-हृदय
शीतलता ला देना प्यारे!!
-सुभद्राकुमारी चौहान
किसी को दुख मत पहुँचाना…सीधी बात।
ReplyDeleteसुन्दर रचनाओं में से एक ||
ReplyDeleteआभार ||
बहुत सुंदर रचना...पढवाने के लिये आभार
ReplyDeleteसादर आभार....
ReplyDeleteसुन्दर रचना पढ़वाने का आभार।
ReplyDeleteसुन्दर रचनाओं में से एक ||
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