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Wednesday, September 7, 2011

शोले ही सही आग लगाने के लिये आ

शोले ही सही आग लगाने के लिये आ
फिर तूर के मंज़र को दिखाने के लिये आ

ये किस ने कहा है मेरी तक़दीर बना दे
आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिये आ

ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा
तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिये आ

दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म मुहब्बत की मिटाने के लिये आ

मतलब तेरी आमद से है दरमाँ से नहीं
"हसरत" की क़सम दिल ही दुखाने के लिये आ

-हसरत जयपुरी

7 comments:

  1. achchhi rachna share kii aapne
    ये किस ने कहा है मेरी तक़दीर बना दे
    आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिये आ

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  2. कहीं ये रंजिश ही सही तो नहीं...बहुत खूब...

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  3. तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिये आ ||

    आपकी संकलन क्षमता और
    स्वाद को प्रणाम ||

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  4. ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा
    तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिये आ

    उफ़....

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  5. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.....

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