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Thursday, June 16, 2011

जहां तक हो सका हमने तुम्हें परदा कराया है

जहां तक हो सका हमने तुम्हें परदा कराया है
मगर ऐ आंसुओं! तुमने बहुत रुसवा कराया है

चमक यूं ही नहीं आती है खुद्दारी के चेहरे पर
अना को हमने दो दो वक्त का फाका कराया है

बड़ी मुद्दत पे खायी हैं खुशी से गालियाँ हमने
बड़ी मुद्दत पे उसने आज मुंह मीठा कराया है

बिछड़ना उसकी ख्वाहिश थी न मेरी आरजू लेकिन
जरा सी जिद ने इस आंगन का बंटवारा कराया है

कहीं परदेस की रंगीनियों में खो नहीं जाना
किसी ने घर से चलते वक्त ये वादा कराया है

खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
ये वो औरत है जिसने उम्र भर पेशा कराया है

-मुनव्वर राना

21 comments:

  1. वाह ! मुनव्वर राना को पढ़कर मजा आ गया |
    एक बार फिर
    बेहतरीन स्वाद |
    हमारी दाद ||

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  2. खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
    ये वो औरत है जिसने उम्र भर पेशा कराया है
    bahut sunder gharai liye hue bahut shasher.bahut hi laajabab najm,badhaai

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  3. खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
    ये वो औरत है जिसने उम्र भर पेशा कराया है
    bahut sunder gharai liye hue bahut shasher.bahut hi laajabab najm,badhaai

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  4. मुनव्वर जी को सुनना/पढना एक अदभुत अनुभव है...

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  5. मुनव्वर जी की रचनाये लाजवाब हैं ...

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  6. खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
    ये वो औरत है जिसने उम्र भर पेशा कराया है
    vivek ji munnavar ji ke chand sher to main samachar patron me padhti rahti hoon aaj aapne inki is rachna ko prastut kar bahut shandar karya kiya hai.aabhar.

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  7. vivek zi munnwarrana ki "maa" par likhe sher post karna na bhule

    "honto pe kabhi uske baddua nahi hoti
    ek ma hi hai jo mujse khafa nahi hoti "

    _____________________________________
    मैं , मेरा बचपन और मेरी माँ || (^_^) ||

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  8. मुनव्‍वर साहब की इस लाजवाब रचना को पढवाने का शुक्रिया।

    ---------
    ब्‍लॉग समीक्षा की 20वीं कड़ी...
    आई साइबोर्ग, नैतिकता की धज्जियाँ...

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  9. 'खुदा महफूज़ रखे मेरे बच्चों को सियासत से
    ये वो औरत है इसने उम्र भर पेशा कराया है '
    .................................बहुत सच्चा शेर
    ...................मुनव्वर राना साहब की इतनी उम्दा ग़ज़ल पढवाने का बहुत-बहुत आभार

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  10. बहुत सुन्दर शब्दों में अपने भाव को बाँधा है...

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  11. मुनव्वर जी की रचनाओ से फ़िर रूबरू कराने के लिये धन्यवाद

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  12. मुनव्वर राना की इस रचना को पढवाने हेतु आभार |

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  13. अच्छी कविता है!बहुत अच्छी
    मेरी लिंक- "samrat bundelkhand"

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  14. आप सभी का बहुत बहुत आभार,
    -विवेक जैन

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