जो तुम आ जाते एक बार
कितनी करूणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग;
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग;
आँसू लेते वे पथ पखार|
हंस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद,
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग;
आँखें देतीं सर्वस्व वार|
-महादेवी वर्मा
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Saturday, October 29, 2011
जो तुम आ जाते एक बार
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