तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी
मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी|
रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर,
ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी|
हज़ार उल्फ़त सताए लेकिन मेरे इरादों से है ये मुमकिन,
अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी|
-ख़्वाजा मीर दर्द
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Tuesday, July 5, 2011
तुम आज हंसते हो हंस लो मुझ पर
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-ख़्वाजा मीर दर्द,
उर्दू,
तुम आज हंसते हो हंस लो मुझ पर,
नज्म,
प्रेम
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