Showing posts with label तूफ़ानों की ओर. Show all posts
Showing posts with label तूफ़ानों की ओर. Show all posts

Thursday, June 2, 2011

तूफ़ानों की ओर

तूफ़ानों की ओर
घुमा दो
नाविक!
निज पतवार!
आज सिन्धु ने विष उगला है
लहरों का यौवन मचला है

आज हृदय में और सिन्धु में
साथ उठा है ज्वार
तूफ़ानों की ओर
घुमा दो
नाविक!
निज पतवार!

लहरों के स्वर में कुछ बोलो
इस अंधड़ में साहस तोलो
कभी-कभी मिलता जीवन में
तूफ़ानों का प्यार
तूफ़ानों की ओर
घुमा दो
नाविक!
निज पतवार!

यह असीम, निज सीमा जाने
सागर भी तो यह पहिचाने
मिट्टी के पुतले मानव ने
कभी न मानी हार
तूफ़ानों की ओर
घुमा दो
नाविक!
निज पतवार!

सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है

इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार
तूफ़ानों की ओर
घुमा दो
नाविक!
निज पतवार!

('प्रलय-सृजन' से)
-शिवमंगल सिंह 'सुमन'