Saturday, May 7, 2011

मुक्ति

कोई एहसान नहीं किया हमने तुम पर !
यह तो तुम्हारा अधिकार था और हमारा कर्तव्य !
पीढियों का ऋण चढा था जो हम पर ,
उतार, दिया तुमने आनन्द और सुख !
आभार तुम्हारा !
आत्मज मेरे !
हमारा अस्तित्व व्याप्त रहेगा ,
जहाँ तक जायेगा तुम्हारा विस्तार !
तुम्हारा विकसता व्यक्तित्व सँवारने में,
चूक गये होंगे कितनी बार
आड़े आ गई होंगी हमारी सीमायें !
पर तुम्हारे लिये खुली हैं आ-क्षितिज दिशायें !
विस्तृत आकाश में उड़ान भरते
कोई द्विविधा मन में सिर न उठाये
कोई आशंका व्याप न जाये !
चलना है बहुत आगे तक ,
समर्थ हो तुम !
शान्त और प्रसन्न मन से
तुम्हें मुक्त कर देना चाहती हूँ अब
और स्वयं को भी -
हर बंधन से, भार से, अपेक्षा और अधिकार से,
कि निश्तिन्त और निर्द्वंद्व रहें हम !
जी सकें सहज जीवन, अपने अपने ढंग से !
क्योंकि प्यार बाँधता नहीं मुक्त करता है
और तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ मैं !
-प्रतिभा सक्सेना

14 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...
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प्रवीण पाण्डेय said...
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प्रवीण पाण्डेय said...

आभार सुन्दर कविता पढ़वाने का, प्रतिभाजी के ब्लॉग का नियमित पाठक हूँ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

प्रतिभा जी की एक और खूबसूरत रचना ...आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 10 - 05 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.blogspot.com/

Vivek Jain said...

प्रवीण जी, आपका आभारी हूँ।
संगीता जी, नहीं पता आपका किन शब्दों में शुक्रिया अदा करुँ।
विवेक जैन

udaya veer singh said...

mukhar dristikon ,sunder srijan,

क्योंकि प्यार बाँधता नहीं मुक्त करता है
और तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ मैं !

badhayi ji .

रचना दीक्षित said...

प्रतिभा जी बहुत खूबसूरत रचना. आभार.

रश्मि प्रभा... said...

विस्तृत आकाश में उड़ान भरते
कोई द्विविधा मन में सिर न उठाये
कोई आशंका व्याप न जाये !
चलना है बहुत आगे तक ,
समर्थ हो तुम ! ... bahut hi badhiyaa rachna

वाणी गीत said...

उन अभिभावकों के लिए सीख है जो बच्चों को एक एहसान की तरह पालते हैं ...
निश्छल प्रेम स्वतंत्र ही करता है , बंधनों में नहीं बांधता...
बहुत सुन्दर !

Khare A said...

bahut hi pyari si rachna!

vandana said...

मुक्त कर दिया आपने बच्चों को आ-क्षितिज विस्तार के लिए ...यही मुक्ति बच्चों को घर की तरफ लौटने को मजबूर करती है यानि बाँध लिया आपने यूँ मुक्त करके साधुवाद

prerna argal said...

bahut sunder rachanaa,aek siksha deti hui ki pyaar bandhan nahi mukti hai aur ye mukti hi apne aap bandhan main baandh deta hai.
man ko chunewaali bhaavpoorn rachanaa.

prerna argal said...
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